विजय शर्मा

शहर

अब हम पहुंचे कहीं,’ इंजीनियर चीख  जब कल ही बिछाए ट्रैक पर चल दूसरी ट्रेन लोगों, कोयला, औजार तथा खाना लेकर आई। घास के मैदान पीली धूप में चमक रहे थे, क्षितिज पर पेड़ों से घिरे बड़े पहाड़ नीली धुंध में नहा लिपटे हुए थे। जंगली कुत्तों तथा भैंसों ने देखा काम और हलचल जंगल की ओर बढ़ी, कोयले और राख के ढेर, कागज, टिन हरे-भरे ग्रामीण इलाके में फैला। पहली पावर आरा मशीन की कानफाड....

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