चित्तरंजन कुमार

नयी सुबह की तलाश

जीवन के अक्स जब कविता में दर्ज होने लगे, तब कविता मानवीय दर्द का निवारण करने लगती है। हमारे दर्द भी विविध आयामी हैं। किसी के लिए निजी दुख पहाड़ है, तो कोई दूसरे के दर्द को भी अपना दर्द समझता है। जीवन के हर्ष-विषाद, मान-अपमान, अमीरी-गरीबी मनुष्य सह लेता है लेकिन उसके साथ किया गया छल, मनुष्य को अंदर से तोड़ देता है। यहां प्रत्येक मनुष्य आंतरिक आघातों से पीडि़त है। मन....

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