अस्मुरारी नंदन मिश्र

वर्तमान और स्मृतियों से मुठभेड़ करती कविताएं

किसी रचना को देखने के दो तरीके हो सकते हैं। एक तो यही कि हम अपनी विवेक-बुद्धि अथवा व्युत्पत्ति से आलोचना के टूल्स विकसित करें और उसके आलोक में रचना को देखने का प्रयास करें। दूसरा तरीका यह भी हो सकता है कि हम रचनाकार के रचनात्मक आदर्श से ही वे टूल्स निकाले और उनके विश्लेषण के बाद रचना के अवगाहन में उन्हें भी आधार बनाएं। मुझे लगता है कि दूसरा तरीका अधिक लोकतांत्र....

Subscribe Now

पूछताछ करें