भावना शेखर

सत्तर के दशक का दस्तावेज है ‘दिनांक के बिना’

जीवन के सातवें दशक में भी सतत सृजनशील वरिष्ठ लेखिका उषा किरण खान ने अपने लगभग पूरे जीवन का लेखा-जोखा जिस किताब में उतार दिया है उसका नाम है-‘दिनांक के बिना’। इसे उनकी आत्मकथा तो नहीं कहा जा सकता क्योंकि इसमें नितांत उन्हीं की कथा नहीं है अपितु उनके जन्म बचपन कैशोर्य से लेकर अद्यतन के आत्मीय जनों स्थितियों घटनाओं का ब्यौरा भी है। पुस्तक में लेखिका के जीवन क....

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