कृष्ण कल्पित

हत्यारों की भाषा बनाम भाषा के हत्यारे

प्रेमचंद के पारखी
महापुरुषों के लिए यह मुश्किल समय है!
उनकी हर जन्म/पुण्य-तिथि पर उनको मूर्खों के धोबीघाट पर अच्छी तरह पछीटा जाता है। ढेर गालियों से उन्हें नवाजा जाता है। उन्हें दलित/स्त्री/आदिवासी/अल्पसंख्यक विरोधी बताया जाता है और उनकी प्रतिमाओं को तोड़ने की या उनका अपहरण करने की कोशिश की जाती है।
प्रेमचंद को भी उनकी जयंती पर ब्राह्मण/दलित/सामंत/स....

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