अरुण कमल

कविकंठाभरण अर्थात् कवि-स्वयं-शिक्षक

जब कभी अवसर मिलता मैं विद्वानों से कुछ न कुछ पूछा करता, जैसे आपकी प्रिय पुस्तकें, प्रिय कवि, जरूरी सलाह वगैरह। इसी तरह एक बार सुअवसर पाकर मैंने नागार्जुन से पूछा, संस्कृत की दस पुस्तकें बताइए जो पढ़ना ही चाहिए। उन्होंने जो दस पुस्तकें बताईं उनमें महाभारत, रामायण, कालिदास और भवभूति तो थे ही, सुभाषितरत्न कोष, सदुक्तिकर्णामृत, गाथासप्तशती भी थे और मृच्छकटिकम् तथ....

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