भूपेंद्र बिष्ट

जिंदगी गोलगप्पे जैसी होंदी है

बात शुरू की जाय, बसंत सकरगाए की ताजा कविता ‘मेरे घर छापा पड़ा’ की कुछ पंक्तियों से: सुबह-सुबह मेरे घर पड़ा छापा---बाकायदा एक चार्जशीट तैयार की गई मेरे खिलाफ निम्न बिंदुवार-कि मेरी जेब से मिले पांच-पांच के नोट पूरे तीस हजार/जबकि मेरी मासिक पेंशन है कुल पच्चीस हजार/ कि बायकॉट के बावजूद मेरी जेब में पाया गया फिल्म लाल सिंह चड्ढ़ा के शो का आधा टिकट/जबकि मनोरंजन-कर ....

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