किंशुक गुप्ता

किंशुक गुप्ता की तीन कविताएं

डायनामाइट और नोबेल


जो निर्माता रहे/इतिहास में/बंदर कहलाएंगे।
        -अज्ञेय


डायनामाइट 
एक सांस लेने जितने समय में
पिघला सकता है इंसान
दरका सकता है दुर्गम पहाड़ 
जिसने अपने सीने पर कभी
जमने नहीं दी घास
पाट सकता है पंक्तिबद्ध बस्तियां
थरथराती चीखों से

डायनामाइट तोड़ सकत....

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