सतीश लोथे

सतीश लोथे की तीन कविताएं

कर्ज

यह बात 
बिल्कुल ही दुरुस्त है 
मै साठ वर्ष की दास्तान तक पहुंच गया हूं 
कालचक्र के अपने हिसाब से--- 
वैसे उमर को कौन रोक पाए आगे जाने से 
और जिंदगी खफा नहीं इस यथार्थ से

फिर भी दोस्तो
आज तक की 
मेरी हैसियत की ऊंचाई नापने 
कोई कदम मत उठा लेना 
जल्दबाजी में 
इस घर का पूरा कर्ज चुकाना 
अभी त....

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