सपना भट्ट

सपना भट्ट की दो कविताएं

सपना भट्ट की दो कविताएं


चाल-चलन

उन्हें हमारे तने कंधे
और सीधी रीढ़ के पीछे के संघर्ष नहीं दिखते

हमारा स्वावलंबी होकर जीना
और अपने श्रम और सामर्थ्य से 
कमाकर खाना नहीं दिखता 

हमारे पैरों से बंधे 
परंपरागत दासता के मन-मन भर के पत्थर नहीं दिखते

गैर बराबरी ....

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