रेणु हुसैन

रेणु हुसैन की चार कविताएं

रेणु हुसैन की चार कविताएं

आंसू


एक कतरा है 
समंदर से भरा 
नमकीन और खारा 
दर्द का इससे कोई लेना देना नहीं
लहरें खुद ही पत्थरों पर आकर टूटती हैं या 
समंदर उन्हें अपने अंदर से धकेलता रहता है
बादल पहाड़ों पर टूट के बरसते हैं या 
घटाएं भर के बरस जाती हैं
धूप की आग के पीछे क्या है 
क्या जमीं की गहरा....

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