डाॅ. बली सिंह

बदलाव का उलट पाठ

हमारे यहां तमाम क्षेत्रों में बदलाव की प्रक्रिया दिखाई दे रही है। इस तरह की बातें कहीं सुनी भी जा रही हैं कि देश बदल रहा है। कोई भी बदलाव अपने आप में अच्छा या बुरा नहीं होता। बदलाव एक मिथ हैं, धारणा है। उसे अक्सर अच्छे अर्थ में लिया जाता है और अपरिहार्य रूप में तो अवश्य ही। यानी उसे रोका नहीं जा सकता। यह सही है कि उसे रोकना मुश्किल है, लेकिन उसके स्वरूप पर तो बात हो सकती है। म....

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