जयनंदन

असगर सुगरकोटिंग या ठकुरसुहाती नहीं करते

असगर वजाहत हिन्दी के एक बड़े बहुपठित लेखक के तौर पर समादृत हैं। इनकी रचनायें यों तो प्रायः सभी विधाओं में मौजूद हैं, जो सभी के सभी अति पठनीय व अतिसंप्रेषणीय हैं और वे सामयिक चुनौतियों तथा सामाजिक जटिलताओं-संक्रमणों का निहितार्थ संकेतों में बड़ी गहराई से प्रकट कर देती हैं। साम्प्रदायिकता के बहुकोणीय संदर्भों और परिस्थितियों को इन्होंने अपनी बहुतेरी रचनाओं में इस तरह च....

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