कमलेश वर्मा

 भारत के दंगों का मानचित्र

‘शाह आलम कैम्प की रूहें’ कहानी आज से लगभग पंद्रह साल पहले लिखी गयी थी. 2007 में प्रकाशित कहानी-संग्रह ‘मैं हिन्दू हूँ’ में यह कहानी संगृहीत है. जाहिर-सी बात है कि इतने समय में इस कहानी को अनेक लोगों के द्वारा अनेक बार पढ़ा गया है. इसके बारे में टीका-टिप्पणी भी हुई है और इसे चर्चित कहानियों में शुमार किया जाता है. 
‘शाह आलम कैम्प की रूहें’ सांप्रदायिक दंगे के विवरणो....

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