विनोद शाही

शाह आलम कैंप की अमर रूहें

'मुझे आज से पचास साल पहले गोली मार कर मार डाला गया था। अब मैं चाहता हूं कि दंगाई मुझे ज़िंदा जला कर मार डालें।'
'तुम ये क्यों करना चाहते हो बाबा?'
'सिर्फ ये बताने के लिए कि न उनके गोली मार कर मारने से मैं मरा था और न उनके ज़िंदा जला देने से मरूंगा।'
असग़र वजाहत की कहानी 'शाह आलम कैम्प की रूहें' का यह अंश महात्मा गांधी के बारे में है। वे अपने जीवन को 'सत्य के साथ ....

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