भारत भारद्वाज

‘सात आसमान’ में असग़र

अपने प्रिय कथाकार एवं अभूतपूर्व मित्र असग़र वजाहत पर लिखते समय अचानक उर्दू के मशहूर शायर जगन्नाथ आजाद की ये काव्य-पंक्तियां- ‘इन्हीं असग़र के पीछे कहीं मेरा घर है/वही जम्मू की गर्मी है/वही जम्मू का मौसम है। कौंध गई। यह मेरा सौभाग्य है कि उन्हें देखने और उनसे मिलने का सुअवसर मुझे जम्मू-प्रवास के दौरान मिला। 
पहले असग़र वजाहत के नाम से और बाद में उनके काम से मैं परिचि....

Subscribe Now

पूछताछ करें