विभूति नारायण राय

असग़र वज़ाहत: एक यायावर क़िस्सा गो

असग़र वज़ाहत मनुष्य और लेखक दोनो अर्थों मे अपने समकालीनों से भिन्न हैं और कई बार यह भिन्नता हमे चकित करती है । मै अक्सर सोचता हूँ कि कैसे एक व्यक्ति अपनी ऊर्जा का इतना रचनात्मक इस्तेमाल अलग अलग क्षेत्रों मे कर ले सकता है ।एकख़ास तरह की क़िस्सागोई है जो हर जगह दिखाई देती है , चाहे उनके कहानी–उपन्यास हों , यात्रा वृत्तांत हों  , नाटक हों या किसी पुराने अनुभव को सुनाने का अ....

Subscribe Now

पूछताछ करें